फार्मर रजिस्ट्री से बदलेगी खेती की तस्वीर, PM-Kisan के साथ KCC लोन भी होगा आसान, बिचौलियों की भूमिका खत्म

दरभंगा। किसानों से जुड़ी सरकारी योजनाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम बढ़ाया है। अब तैयार की जा रही ‘फार्मर रजिस्ट्री’ से न सिर्फ पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्तों का रास्ता आसान होगा, बल्कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया भी पहले से कहीं ज्यादा सरल हो जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और बिचौलियों पर निर्भरता खत्म होगी।

KCC लोन के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर
अब तक KCC लोन के लिए किसानों को बैंक, अंचल कार्यालय और अन्य दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। जमीन से जुड़े दस्तावेज जैसे फर्द और जमाबंदी जमा करने में समय और परेशानी दोनों होती थी। फार्मर रजिस्ट्री लागू होने के बाद बैंकों के पास किसान का पूरा डिजिटल डेटा उपलब्ध रहेगा, जिससे पेपरलेस प्रक्रिया के जरिए बिना लंबी कागजी कार्यवाही के लोन स्वीकृत किया जा सकेगा।

एक क्लिक में वेरिफिकेशन, फसल के हिसाब से लोन तय
फार्मर रजिस्ट्री के जरिए बैंक एक क्लिक में किसान की जमीन और फसल से जुड़ा रिकॉर्ड देख सकेंगे। किसान कौन सी फसल उगा रहा है, उसी आधार पर लोन की सीमा तय की जाएगी। इस रजिस्ट्री को ‘यूनिक फार्मर आईडी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य किसानों को सीधे लाभ पहुंचाना और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना है।

पीएम-किसान, बीमा और मंडी में मिलेगा सीधा फायदा
फार्मर रजिस्ट्री बनने के बाद पीएम-किसान सम्मान निधि की किस्तें बिना किसी रुकावट के सीधे किसानों के खाते में पहुंचेंगी। फसल नुकसान की स्थिति में बीमा क्लेम की राशि भी तेजी और पारदर्शिता के साथ मिलेगी। वहीं मंडी में अनाज बेचते समय किसानों को बार-बार अलग से सत्यापन कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नाम और जमीन रिकॉर्ड की गड़बड़ी बनी बड़ी बाधा
बिहार के दरभंगा जिले में कई किसान जमीन की जमाबंदी रसीद में खाता-खेसरा गायब होने, लाभुक और उनके पिता के नाम में त्रुटि, पूर्वजों के नाम पर जमीन दर्ज होने और भूमि का दाखिल-खारिज न होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। जमीन के रिकॉर्ड और आधार कार्ड में नाम की अशुद्धियों के कारण बड़ी संख्या में किसान सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

अभियान चलाकर सुधार की कोशिश, लेकिन चुनौतियां बरकरार
सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाया है, हालांकि जमीनी स्तर पर अब भी कई दिक्कतें सामने आ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों की डिजिटल पहचान के रूप में फार्मर आईडी तैयार की जा रही है, ताकि पीएम-किसान और अन्य कृषि योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।

2 फरवरी से शुरू हुआ फार्मर आईडी का तीसरा चरण
दरभंगा के जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. सिद्धार्थ के अनुसार फार्मर आईडी बनाने का तृतीय चरण 2 फरवरी से शुरू हो चुका है। पीएम-किसान सम्मान निधि का लाभ पाने के लिए फार्मर आईडी बनाना अनिवार्य है और जमाबंदी स्वयं के नाम पर होना जरूरी है। कई जगह जमीन में नाम की अशुद्धि, खाता-खेसरा शून्य और रकवा शून्य जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें शिविरों में हल्का कर्मचारी मौके पर ही ठीक कर रहे हैं।

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